स्वप्नदोष का आयुर्वेदिक उपचार

स्वप्नदोष की जानकारी-

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बहुत ज्यादा कामुक प्रवृति का होने के कारण, दिनभर स्त्रियों व खूबसूरत युवा लड़कियों के बारे में अश्लील कल्पनायें करना, बुरी संगत के कारण, अश्लील फिल्में देखना या किताबें पढ़ना। इन सबके चलते व्यक्ति के दिलो दिमाग पर कामवासना की एक गहरी छाप पड़ी रहती है, जोकि लंबे समय तक रहने के कारण नींद में भी सताने लगती है और व्यक्ति नींद में ही स्वप्न में किसी सुंदर स्त्री के साथ खुद को संभोगरत देखता है और देखते ही देखते उसका वीर्य स्खलन हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को ही स्वप्नदोष कहते हैं, जिसे अंग्रेजी में ‘नाईट फाॅल’ भी कहा जाता है।

स्वप्नदोष कोई गंभीर रोग तो नहीं?

जी नहीं, स्वप्नदोष होना कोई गंभीर बात नहीं है और न ही इससे घबराने की आवश्यकता है। बढ़ती उम्र व युवा वर्ग में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण होना स्वाभाविक है और इसी के चलते स्वप्नदोष भी होता है, जोकि वो भी स्वाभाविक है। इसलिए यदि माह में एक से दो बार स्वप्नदोष होता है, तो कोई फिक्र करने वाली बात नहीं है। किन्तु हां, यदि गलत आदतों व संगत के कारण कई-कई बार या फिर लगातार स्वप्नदोष होता है, तो यह गंभीर विषय हो सकता है, जिसका उपचार समय रहते करवाना अनिवार्य हो जाता है। अन्यथा यह रोग कई अन्य सेक्स समस्याओं का कारण बनकर आपकी शादीशुदा जिंदगी को भी खतरे में डाल सकता है।

स्वप्नदोष रोकने के लिए देसी आयुर्वेदिक उपाय-

1. गुलाबी रंग के प्याज एक किलो आँवले के साईज के लेकर ऊपर का छिलका उतार कर प्रत्येक प्याज को चैकोर चीरा लगाकर रख लें। फिर शहद 2 किलोग्राम में इन प्याजों को उबालें। 2-3 उबालें आने पर उतार लें। ठण्डा होने पर मर्तबान में रख लें। रात को सोते समय एक प्याज खाकर ऊपर से मामूली गर्म गाय का दूध पीयें। इससे स्वप्नदोष की समस्या जड़ से समाप्त हो जायेगी। यहाँ तक कि शादी से पहले व शादी के बाद की कमजोरी भी ठीक हो जायेगी। 41 दिन तक यह नुस्खा करने पर शरीर पर चेहरे आ जाती है तथा कमजोरी दूर होकर स्वास्थ्य में लाभ होता है।

2. असगन्ध, शतावर, सफेद मूसली और कौंच के बीज बराबर-बराबर लेकर चूर्ण करके 1-1 चम्मच सुबह-शाम सुखोष्ण दूध के साथ प्रतिदिन प्रयोग करते रहने से स्वप्नदोष तो दूर होता ही है, साथ ही यह नामर्दी दूर करने का भी बहुत ही उत्तम उपाय है।

Swapandosh Ka Ayurvedic Upchar

3. दूध आधा लीटर में शतावर 10 ग्राम पीसकर औटायें। जब दूध 350 मि.लि. शेष रह जाये, तो मिश्री मिलाकर पी लें। इस दूध के प्रयोग से संभोगेच्छा में वृद्धि होती है तथा शिश्नेन्द्रिय में शिथिलता नहीं आती है। 40 दिन तक प्रतिदिन प्रयोग करना चाहिए। स्वप्नदोष में भी है कारगर।

4. केवांच के छिलका सहित बीजों का दलिया और गेहूँ का दलिया प्रत्येक 10 ग्राम गाय के आधा किलो दूध में पकायें। खीर बन जाने पर घी 10 ग्राम और शक्कर 2 मि.ग्रा. मिलाकर खायें। ऊपर से यही खीर का दूध पी लें। यह योग प्रबल कामशक्ति प्रदान करता है और स्वप्नदोष जैसी सेक्सुअल समस्या से भी छुटकारा दिलाता है।

5. ऊंटकटारा की जड़ की छाल 3 ग्राम, पुष्करमूल 3 ग्राम, असगंध 1 ग्राम। ऐसी 1-1 मात्रा दिन में 2 बार खाने से एक सप्तह में ही अत्यधिक शक्ति बढ़ती है तथा शुक्रकीट बढ़ जाते हैं और स्वप्नदोष भी नहीं होता है।

6. यदि नामर्द 3 माह तक असगन्ध के चूर्ण को घी व शहद में मिलाकर चाटे और ऊपर से दूध पी ले एवं ब्रह्यचर्य का पालन करे तो 3 मास बाद उसमें गजब की शक्ति उत्पन्न हो जाती है।

7. असगन्ध, सौंठ, बिधारा- तीनों को समभाग कूट छान लें। फिर इसमें समान मात्रा में मिश्री पीसकर मिला लें। प्रतिदिन 5 से 10 ग्राम तक फाँककर ऊपर से 250 मि.लि. दूध पीते रहने से वीर्य पुष्ट होता है तथा स्तम्भन शक्ति एवं कामोत्तेजना बढ़ती है। वीर्य विकार, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन आदि दोष भी दूर हो जाते हैं।

8. गोखरू, तालमखाना, शतावर, कौंच के बीजों की गिरी, बड़ी खिरेटी तथा गंगेरन प्रत्येक 10 ग्राम को कूट-छानकर बारीक चूर्ण की भाँति बना लें। रात को 5 से 10 ग्राम चूर्ण फाँककर ऊपर से गर्म दूध पी लें। 60 दिन तक प्रयोग करने से यह योग अपूर्ण चमत्कार दिखाता है।

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