सुहागरात की जानकारी

सुहागरात में संभोग के अतिरिक्त दूसरा विकल्प क्या है?

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आज के युवा वर्ग से या फिर किसी से भी यह प्रश्न किया जाये कि सुहागरात में क्या होता है, तो जवाब एक ही आयेगा.. सेक्स! यानी संभोग। याने कि सभी की मानसिकता यही है कि सुहागरात में पति-पत्नी के बीच केवल सेक्स होता है, जोकि उनकी सोच के अनुसार जरूरी है। यह रात जिसे सुहागरात का नाम दिया गया है, यह बनी ही सेक्स के लिए है, ऐसी धारणा सभी की बन चुकी है।

किन्तु ऐसा जरूरी नहीं है। हां, काफी हद तक यह सही भी है कि इस रात को पति-पत्नी के बीच ‘शारीरिक मिलन’ होता है। लेकिन इसे एक अटल कर्म समझ लेने की मूर्खता करना सही नहीं है। शारीरिक मिलन से अधिक महत्व होता है, दो दिलों का मिलन, दो आत्माओं का मिलन। दोनों का प्रेम और सम्मान का रिश्ता मजबूत करना। यह रात एक-दूसरे पर विश्वास करने की और पूरी जिंदगी की एक मजबूत नीवं रखने की रात होती है।

यहां एक बात कहना चाहूंगा कि सेक्स तो पशू-पक्षी भी कर लेते हैं, किन्तु उनमें संवेदनशीलता, धैर्य और एक-दूसरे को समझने की क्षमता का सर्वदा अभाव होता है। यह गुण ईश्वर ने केवल मनुष्य को वरदान के रूप में दिया है कि वह सोच-समझ सकते हैं, प्रेम की परिभाषा समझ सकते हैं, एक-दूसरे को समझा सकते हैं और धैर्य रखते हुए एक-दूसरे का साथ जीवन भर तक निभा सकते हैं।

कहने का तात्पर्य यह है कि मनुष्य हो तो मनुष्यता दिखाने का अवसर भी सुहागरात में न गंवायें। यदि पति-पत्नी में से किसी एक का भी मन सेक्स के लिए राजी नहीं है, तो जबरदस्ती करने की, दबाव बनाने की या फिर नाराज होने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि संयम से अपने साथी को समझने की जरूरत है और उसे यह एहसास करने की जरूरत है कि आपको केवल उनके शरीर से मतलब नहीं है, बल्कि आप तो उनका जीवन भर का विश्वास और प्रेम पाना चाहते हैं। उनका सम्मान करना चाहते हैं।

एक अलग दृष्टिकोण से जानते हैं कि सुहागरात में सेक्स जरूरी है कि नहीं-

एक सोच ऐसी बन गई है कि ”सुहागरात में सेक्स तो करना ही चाहिए!“ कुछ मर्दों की या फिर कुछ पुराने विचारों के लोगों की मानसिकता ऐसी है कि यदि सुहागरात में पुरूष सेक्स न करे तो इससे उसकी मर्दानगी झूठी साबित हो जाती है। उनकी दृष्टिकोण में सेक्स तो जरूरी है ही, इसके साथ-साथ गजब का प्रदर्शन भी होना जरूरी है। क्योंकि यदि इस पहली रात को ही खराब प्रदर्शन किया, तो पूरी जिंदगी सेक्स में असफलता का स्वाद चखना पड़ेगा।

ऐसी मानसिकता रखने वालों को क्या कहें। यही कहेंगे, यह सब बेकार के भ्रम व वहम हैं। ऐसा कुछ भी नहीं होता है। केवल खुद से अपने विचार बनाकर समाज द्वारा थोपी गई बातें हैं।

सुहागरात में सेक्स के अतिरिक्त भी बहुत से ऐसे विकल्प हैं, जिनके द्वारा सुहागरात को एक हसीन व यादगार रात बनाया जा सकता है। और वैसे भी पति-पत्नी का साथ और प्रेम केवल एक रात के सेक्स पर निर्भर नहीं करता है। सेक्स के लिए तो पूरी जिंदगी पड़ी है।

आइये जानते हैं कि सुहागरात में सेक्स के अतिरिक्त क्या करें..

वार्तालाप करें :  सुहागरात में बातचीत करना भी एक बहुत अच्छा विकल्प है। लेकिन बातचीत का टाॅपिक गंभीर नहीं होना और न ही एक-दूसरे की कमियां गिनाना। बातचीत तो प्रेम भरी, एक-दूसरे की प्रशंसा, एक-दूसरे के परिवार वालों की प्रशंसा। यदि विवाह के दौरान कोई भी ऐसी बात जो आपको बहुत अच्छी लगी हो एक-दूसरे के परिवार वालों की तरफ से, तो उसकी भी खुलकर प्रशंसा करें। इसके अलावा सुहागरात को और भी अधिक दिलचस्प बनाना है, तो अपने साथी से कोई ऐसी दिल की बात कहें या राज़ कहें, जो आप सिर्फ उनसे ही शादी से पहले या शादी के बाद कहना चाहते थे। दिल के जज़्बात कह देने से एक-दूसरे पर विश्वास और प्रेम की डोर और भी मजबूत हो जायेगी।

भविष्य की चर्चा :
विवाह का संबंध केवल सुहागरात या सुहागरात में सेक्स को लेकर तक ही सीमित नहीं होता, बल्कि यह तो जीवन भर का साथ होता है। और जीवन में यदि पहले से आप दोनों भविष्य की योजना लेकर चलें, तो राह और भी आसान हो जाती है। इसलिए सुहागरात में यदि आप अपने भविष्य की योजना को लेकर अपनी बात अपनी पत्नी के सामने रखते हैं, तो उसे खुशी होगी कि आपने उन्हें वास्तव में अपना सच्चा साथी माना है। तभी तो आप उनसे केवल सेक्स की बातें न करके, भविष्य को लेकर भी उत्साहित और जागरूक हैं, जोकि एक सच्चे और जिम्मेदार पुरूष की निशानी होती है।

गोपनीय उपहार दें :  गोपनीय उपहार यानी सरप्राइज गिफ्ट। जी हां, इस रात्रि को एक-दूसरे को अचानक से कोई गोपनीय उपहार देकर आप अपने साथी को चैंका कर खुश कर सकते हैं। यदि पहले से एक-दूसरे की पसंद-नापसंद को जानते हैं तो और भी बढ़िया है। फिर तो उसी अनुसार उपहार दें। यदि नहीं भी जानते हैं तो भी उपहार जरूर दें। ध्यान रखें आपके दिये इस उपहार को आपका साथी पहली रात की निशानी समझ कर जीवन भर अपने घर और दिल में संजोकर रखने वाला है।

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सच्चा वायदा करें :

विवाह के रिश्ते को मजबूती से निभाने की सबसे अहम कड़ी होती है विश्वास की। यदि आपका एक-दूसरे पर पूर्ण विश्वास व भरोसा है, तो आप दोनों को अपना रिश्ता निभाने में बहुत आसानी होती है। दिल में एक जोश व सुकून होता है कि मेरा साथी मेरा साथ जिंदगी भर निभायेगा। इसलिए इस रात को एक-दूसरे हाथ थामकर, आंखों से आंखें मिलाकर आपस में वायदा करें कि कभी आपस में कोई बात नहीं छुपायेंगे, चाहे कैसे भी हालात हों एक-दूसरे का साथ निभायेंगे और जो प्रेम और विश्वास आज एक-दूसरे पर है, वो जिंदगी भर रहेगा, मरते दम तक रहेगा।

आराम करें :

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विवाह की लंबी-चैड़ी रस्में निभाते-निभाते अक्सर दूल्हा-दुल्हन बहुत ज्यादा थक जाते हैं। इसलिए भी कई बार पहली रात को संभोग के लिए मन नहीं करता। अगर आप भी थकान महसूस कर रहे हों, तो इस रात्रि को एक-दूसरे की बांहों में बांहें डाले सो सकते हैं। नींद पूरी करके आराम कर सकते हैं। सेक्स को बाद के लिए भी टाला जा सकता है। और वैसे भी जब तन और मन दोनों ही साथ नहीं देंगे तो सच्चे सेक्स का आनंद भी नहीं उठा पायेंगे आप दोनों।

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Suhagrat Ki Jankari. इस रात को पति-पत्नी के बीच ‘शारीरिक मिलन’ होता है। लेकिन इसे एक अटल कर्म समझ लेने की मूर्खता करना सही नहीं है।
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