शीघ्रपतन (Premature Ejaculation)-

स्त्री के साथ संभोगकाल के दौरान अपनी स्त्री या महिला साथी को संतुष्ट किए बिना स्खलित हो जाना शीघ्रपतन कहलाता है।
जो पुरूष मूर्ख और जल्दबाज नहीं होता, वह अपनी प्रेमिका के हृदय को जीत लेता है। यह एक ऐसा गुण है, जिसे प्रत्येक प्रेमी और पति को गांठ में बांध लेना चाहिए। एक कहावत है ‘सहज पके सो मीठा होए’। इसलिए आवश्यक है कि पुरूष को यौन समागम के लिए आवश्यकता से अधिक शीघ्रता नहीं करनी चाहिए। स्त्री यौन कार्य के लिए तैयार है, यह जानने के लिए उसकी योनि के ऊपर हाथ फेरकर देखना चाहिए। यदि उस की योनि पर चिकना द्रव लगा हुआ दिखाई दे तो समझ लेना चाहिए कि वह संभोग के लिए तैयार हो गई है और उसके साथ अब यौन समागम किया जा सकता है।

शीघ्रपतन के लिए देसी नुस्खे-

1. सिंघाड़ा शुष्क, चुनिया गोन्द प्रत्येक 6 ग्राम, तालमखाना, सालब मिश्री 4 ग्राम, माजू हरे 3 ग्राम, रोमी मस्तगी 2 ग्राम, मिश्री समान वजन मिलाकर महीन चूर्ण बनायें। 5 ग्राम की मात्रा मंे गाय के दूध के साथ प्रयोग करें। शीघ्रपतन दूर करता है।

2. बहुफली चूर्ण 5 ग्राम पन्द्रह दिन प्रयोग करें। अन्य किसी औषधि की आवश्यकता नहीं रहेगी।

3. सालब मिश्री, मस्तगी रोमी, लाख झरबेरी समान मात्रा में लेकर बारीक पीसकर गूलर के दूध की सहायता से चने के आकार की गोलियाँ बना लें। प्रतिदिन 1 गोली कुछ दिन तक प्रयोग करें। एक गोली संभोग से पूर्व लें।

4. ब्रह्म डण्डी का चूर्ण 7 ग्राम प्रतिदिन सुबह खा लेने वाला शीघ्रपतन की समस्या से मुक्ति पा सकता है।

5. बिदारीकन्द, गोखरू प्रत्येक 4 ग्राम बारीक पीसकर मिश्री से दूध के साथ फांकने से शीघ्रपतन दूर हो जाता है।

6. खांड आधा सेर, कालीमिर्च, लौंग, मुनक्का, तज, पत्रज, बादाम, जीरा सफेद, तवाशीर, शतावर, चिरौंजी, पीपलामूल, काला जीरा, छोटी इलायची, धनिया, वंशलोचन, सन्दल, सोंठ, बीज कौंच, पीपल, कवंलगट्टा, मोथा, काली व सफेद मूसली समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। 5 ग्राम प्रतिदिन प्रयोग करें।

7. हरड़, बहेड़ा, आंवला, काले तिल समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। 6 से 10 ग्राम तक शहद में चाटने से बूढ़ा भी संभोग शक्ति प्राप्त कर लेता है।

8. बिसबासा, मोचरस, तवाशीर, जायफल, केसर, अजवायन खुरासानी, माजू, छालिया, मस्तगी, छोटी इलायची, नागेसर, गुग्गल समान मात्रा में लेकर कूट-छानकर चने के बराबर गोलियाँ बना लें। एक गोली प्रतिदिन प्रयोग करें। कुछ दिन के प्रयोग से आप अपने आपको पूर्ण पुरूष समझने लगेंगे।

9. सफेद प्याज का रस 8 ग्राम, अदरक का रस 6 ग्राम, शहद तथा घी 3 ग्राम। इनको मिलाकर दो माह तक प्रतिदिन प्रयोग करते रहने से नपुंसक व्यक्ति भी पुन्सक हो जाता है।

10. सफेद मूसली, सत गिलोय, कौंच बीज, मूसली सिम्बल, मिश्री, आंवला समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। 6 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ खायें।

11. हरमल के बीज, खुरासानी अजवायन, कद्दू की गिरी प्रत्येक 5 ग्राम, भुने चने 7 ग्राम, पोस्त खशबाश बड़ी दो अदद, भंग के बीज 8 ग्राम, अफीम 3 ग्राम। सबसे पहले सब औषधियों को अत्यंत महीने पीसकर पोस्त खशखास को 100 ग्राम पानी में भिगोयें। 24 घण्टे के पश्चात् खूब मलकर छान लें। इस पानी से चूर्ण को खूब खरल करें। 1 या 2 रत्ती की गोलियाँ बना लें। आवश्यकता के समय दो घण्टे पूर्व दूध के साथ प्रयोग करें। अत्यंत लाभप्रद है।

12. जायफल, लौंग, अकरकह, सोंठ, आक की जड़, कंकोल, केसर, मस्तगी रूमी, अफीम, दारू हल्दी, सफेद सन्दल। समान मात्रा में लेकर खूब बारीक करके शहद की सहायता से चने जितनी गोलियाँ बना लें। 1 गोली दूध के साथ लें। अत्यधिक स्तंभन होगा।

13. पारा, गन्धक, लौंग, कंकोल, नागरमोथा, कबाब, चीनी सब समान मात्रा में लें। पारा गन्धक की कजली बनाकर शेष औषधियों को बारीक पीसकर मिलाकर शहद में गूंथकर 2-2 ग्राम की गोलियाँ बना लें। संभोग से एक घंटा पूर्व 1 गोली दूध के साथ खायें।

14. दूध मेें छुहारे डालकर पकायें। फिर उसमें मिश्री मिलाकर पिया करें। इससे वीर्योत्पत्ति होती है। पतला वीर्य गाढ़ा होता है तथा सहवास के समय स्तम्भन भी होता है।

15. बरगद वृक्ष के पके लाल फल छाया में सुखा लें। कूट-छानकर चूर्ण बना लें। आधे वजन में शकरतरी मिलाकर प्रतिदिन 10 ग्राम प्रयोग करें। दो-तीन सप्ताह के प्रयोग से अत्यंत लाभदायक परिणाम निकलते हैं।

16. सुपारी वृक्ष का गोन्द, बरगद का दूध समान मात्रा में खरल करके आधा-आधा ग्राम की गोलियाँ बना लें। 1 या 2 गोली दूध के साथ लें।

17. हरमल 50 ग्राम को करेले के हरे पत्तों के रस में तीन बार तर व शुष्क करें। फिर चूर्ण बनाकर रख लें। 1 ग्राम प्रतिदिन दें। शीघ्रपतननाशक योग है।

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