कष्टरज, मासिक धर्म पीड़ा से आना, कृच्छार्तव, रजःकृच्छता
डाइमेनरिह्या(Dysmenorrhoea)-

परिचय-

मासिकधर्म प्रारम्भ होने से 5-6 दिन पहले कमर, पेडू और पूरे शरीर में बहुत अधिक पीड़ा होती है। पेड़ू में तो ऐसी तीव्र पीड़ा होती है, जो संवेदनशील स्वभाव की रोगिणी चिल्लाकर रोने के लिए बाध्य हो जाती है। स्राव काला आभायुक्त आता है। स्राव जारी होने पर पीड़ा में कुछ कमी आ जाती है। जब तक स्राव खुलकर नहीं आता है, हाथ-पैरों में जलन होती है। स्त्रियों के लिए यह कष्टदायी रोग है।

चिकित्सा-

1. उलट कम्बल की जड़ की छाल का चूर्ण 3.75 ग्राम और काली मिर्च 21 नग का चूर्ण मिलाकर मासिकधर्म के समय 7 दिन तक दें। भोजन में केवल दूध भात दें। संभोग को बिल्कुल कर त्याग कर पवित्र जीवन व्यतीत करें। इस प्रकार 2-4 मास तक प्रत्येक मासिकधर्म के समय 7 दिन तक यह योग देने से गर्भाशय के तमाम दोष दूर हो जाते हैं।

2. कपास की जड़ की छाल का क्वाथ पीने से मासिकधर्म के समय होने वाला कष्ट ठीक हो जाता है।

3. केसर और अकरकरा की गोली बनाकर देने से मासिकधर्म ठीक आने लगता है।

4. कष्टरज की रोगिणी के लिए कुल्थी हितकारी है।

5. कोमल के फलों का सेवन ऋतुस्राव को नियमित करता है।

6. खतमी के काढ़े का सेवन नित्य सुबह-शाम करने से रूका मासिकधर्म आना आरम्भ हो जाता है।

7. श्वेत पुनर्नवा(श्वेत गदपुर्ना) की जड़ 2 से 4 ग्राम नित्य सुबह-शाम लेने से गर्भाशय की सूजन के कारण उत्पन्न रजोरोग में देने से लाभ होता है।

8. घासलेट(मिट्टी का तेल) में कपड़ा भिगोकर योनि में रखने से मासिकधर्म ठीक आता है।

9. घीग्वार(ग्वारपाठा) के गूदे पर पलाश क्षार भुरभुरा कर खाने से मासिकधर्म ठीक आने लगता है।

10. चमेली के पंचांग का क्वाथ पीने से मासिकधर्म की रूकावट ठीक हो जाती है। इस योग से यकृत और प्लीहा(तिल्ली) की क्रिया भी सुधरती है।

11. चोबेहयात(हिन्दी/यूनानी नाम) की रील 250 मि.ग्रा. से 1 ग्राम तक नित्य 3 बार लेने से कष्टरज और मासिकधर्म की रूकावट दूर हो जाती है। धैर्य के साथ लगातार लेने से गर्भाशय की शुद्धि होकर स्त्री सन्तानोत्पत्ति के योग्य हो जाती है।

12. नीम बकायन के रस में अकरकरा का रस मिलाकर नित्य सुबह-शाम पीने से कष्टरज का कष्ट दूर होकर मासिकधर्म नियमित आता है।

13. बचो की जड़ का क्वाथ नित्य दो बार लेने से मासिकधर्म नियमित आता है।

14. मोथा और गुड़ मिलाकर गोली बनाकर तिलों के क्वाथ से लेने मासिकधर्म ठीक आने लगता है।

Masik Dharm Ke Samay Dard Ke Ayurvedic Upay

15. समुद्रफल को गुड़ के साथ तीन दिन तक लेने से मासिकधर्म नियमित आता है।

16. सुपारी पाक के नियमित सेवन से योनि और रजः संबंधी अनेकर विकिार दूर हो जाते हैं।

17. बाँस के पत्ते 100 ग्राम और सोआ(सौंफ का प्रकार) 100 ग्राम यवकुट करके पानी 3 लीटर में औटायें। जब पानी 750 मि.ली. शेष रह जाये तो छानकर पुराना गुड़ 100 ग्राम मिला लें। ऋतु के समय 25 मि.ली. नित्य चार बार पिलायें। इससे रूका मासिकधर्म जारी हो जाता है, इसे अधिक मत दें। अधिक देने से रक्तस्राव अधिक होता है। इस योग से मासिकधर्म सामान्य अवस्था में आता है। यदि कष्टरज के कारण बन्ध्यापन हो तो इससे बन्ध्यापन दूर हो जाता है। औंटाते समय बर्तन को ढके नहीं, बर्तन मिट्टा का हो।
नोट- मासिकधर्म जारी होते ही इसे प्रारम्भ कर दें। जब तक रक्त गंदा और काला आ रहा हो तो इसे 4 बार प्रतिदिन दें। लाल रक्त आने लगे तो बंद कर दें। पुनः अगले चक्र में इसी प्रकार दें। यदि गर्भाधान हो जाये तो इसे बंद कर दें। प्रत्येक मासिकधर्म में 4 दिन तक दें।

18. त्रिकुटा(सोंठ, काली मिर्च, पीपर) 3 ग्राम का काढ़ा पुराना गुड़ मिलाकर पीने से मासिकधर्म आने लगता है।

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